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विश्व आदिवासी दिवस पर खुटिया में गूंजा अधिकार और संस्कृति का संदेश, दीपक प्रताप देव ने युवाओं से किया एकजुट होने का आह्वान

धुरकी प्रखंड अंतर्गत खुटिया पंचायत के खेल मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पखवारा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया

संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा ✅ धुरकी प्रखंड अंतर्गत खुटिया पंचायत के खेल मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पखवारा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, इतिहास और संवैधानिक अधिकारों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में युवा समाजसेवी सह भवनाथपुर विधानसभा प्रत्याशी दीपक प्रताप देव मुख्य रूप से शामिल हुए और उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

IMG 20260823 WA0043 1कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाज, वेशभूषा और आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत को सामने रखा गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने आदिवासी संस्कृति की विविधता और परंपराओं को संरक्षित रखने का संकल्प लिया।

IMG 20260823 WA0044अपने संबोधन में दीपक प्रताप देव ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के साथ गहरे जुड़ाव के साथ जीवन जीता आया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण आदिवासी समाज की जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में समाज की संस्कृति और परंपराओं को केवल उत्सव तक सीमित रखने के बजाय आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत है।

उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को समाज के विकास का आधार बताते हुए कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा के अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति, भाषा, परंपरा और मूल जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।

दीपक प्रताप देव ने कहा कि समाज के विकास के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक भागीदारी और जागरूकता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे और समाज के अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाएंगे, तभी वास्तविक बदलाव की दिशा मजबूत होगी।

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस समाज की पहचान, अधिकार और गौरव को याद करने के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी है।

आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा एवं आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संदेश प्रमुखता से देखने को मिला।

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